देकर शरण भोले अपने में समा लेना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना........

कही धरती डोले है, कही अंबर है बरसे,

तुमसे मिलने को भोले मिलने ना दे करते,

मुश्किल बड़ी राहें है, रस्ता भी दिखा देना,

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना........

दर दर क्यों भटकु मैं, कुछ मुझमे कमी होगी,

अपनी सेवक रखलो, कदमो में जमीन होगी,

हलातों से लड़ लड़कर, जीना भी सीखा देना,

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना........

जब भी पुकारू मैं तुमको, तुम्हे आना ही होगा,

इतनी विनती है मेरी, तुम्हे पार लगाना होगा,

जैसी हु तेरी हु, चरणों में जगह देना,

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,

देकर शरण अपनी अपने में समा लेना........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।