आदि अनंत मेरे शिव महाकाल है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आदि अनंत मेरे शिव महाकाल है,

यही तो सृष्टि के कालो के काल है,

आदि अनंत मेरे शिव महाकाल है.....

लिंगो के लिंग उज्जैन शिवलिंग है,

बारह में ये इक महान ज्योर्तिलिंग है,

महाकलेश्वर में इनका साशन है,

आदि अनंत मेरे शिव महाकाल है.....

कालों के मुख से निकाल ये लाते है,

कालो के काल महाकाल कहलाते है,

माथे पे चंदन रूप विकराल है,

आदि अनंत मेरे शिव महाकाल है.....

वेदो पुराणों में लिख मिलता है,

भोले की मर्ज़ी से सब चलता है,

त्रिशूलधारी भोले पहने मृग की छाल है,

आदि अनंत मेरे शिव महाकाल है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।