बरसाने मे झूला पड़ गयो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बरसाने में झूला पड़ गयो, झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो......

आयो सावन सखी मनभावनो, छाई हरियाली चाहूं ओर,

सखी री सावन आए गयो, बरसाने में झूला पड़ गयो,

झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो....

सखी बादल गरजत बिजुरी संग, ओ घन बरसत है घनघोर,

सखी री सावन आए गयो, बरसाने में झूला पड़ गयो,

झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो....

कहे वन वन पड़यो हिंडोरना, कैसे पवन चले झकझोर,

सखी री सावन आए गयो, बरसाने में झूला पड़ गयो,

झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो....

झोटा होले होले देवे सांवरा, झूले कुंवर किशोरी सिर मोर,

सखी री सावन आए गयो, बरसाने में झूला पड़ गयो,

झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो....

झोटा देय सखिरी सब गाय रही, नाचे मोर पपिहा करे शोर,

सखी री सावन आए गयो, बरसाने में झूला पड़ गयो,

झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो....

झूलत गल बैयां डाल के, वरुणेश निरख़ तिन्ही और,

सखी री सावन आए गयो, बरसाने में झूला पड़ गयो,

झूला झूले री नवल किशोर सखी री सावन आए गयो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।