तेरे रज रज दर्शन पावा इक वारि खोल अखियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे रज रज दर्शन पावा इक वारि खोल अखियाँ,

खोल अखियाँ खोल अखियाँ,

तेरे रज रज दर्शन पावा.....

कोई ता कहंदा प्यारा दिल विच वसदा,

असली ठिकाना तेरा कोई भी न दसदा,

कोई भी न दसदा श्याम,

की करा के दर नु जावा,

एक वारि खोल अखियाँ,

तेरे रज रज दर्शन पावा......

तेरे दर्श दी मैं हां दीवानी, अपना चरना दी दे जा निशानी,

दे जा निशानी श्यामा दे जा निशानी,

अखियाँ प्यासियाँ नु होर तरसा न,

एक वारि खोल अखियाँ,

तेरे रज रज दर्शन पावा..........

तेरा दर्श पा के वारि वारि जावा,

श्याम नाम दी गंगा विच गोते पई लावा,

श्याम प्रेम दी ज्योत जगावा,

एक वारि खोल अखियाँ,

तेरे रज रज दर्शन पावा..........

तेरे चरना च मैं रेन गुजारा,

तेरे दर्श बिना मैं चैन ना पावा,

अखा थक गईयाँ तक तक राहवा,

एक वारि खोल अखियाँ,

तेरे रज रज दर्शन पावा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।