मोहे ला दो भजन की वही माला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला,

प्रभु नाम के मोती,

महिमा राम नाम की होती,

मन हो जाये मतवाला..

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला...

जिसकी कृपा से रत्नाकर भी,

रामायण लिख जावें,

जिसकी कृपा से नयनहीन भी,

सूर श्याम कहलाये,

मीरा जोगन हो जावे,

गिरधर के रंग रंगाये,

पीये दीवानी विष प्याला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला.......

धूप दीप अर्चन साधन न,

जोग कोई बतलाये,

चरण शरण ही जा बैठे,

और भव सागर तर जाए,

काशी काबा न जाए,

चाहे गंगा न नहाये,

बस राम की फेरे माला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला......

जनम जनम के इस चक्कर से,

खुद को आज बचा ले,

राम नाम का हो जा प्राणी,

राम नाम अपना ले,

अरे बन जा सवाली,

भर ले झोली तू खाली,

सारे जग का वो रखवाला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला,

मोहे ला दो भजन की,

वही माला, वही माला......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।