मैं तो बांके की बांकी बन गई

मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा,

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा......

इस बांके का सब कुछ बांका,

इस बांके का सब कुछ बांका,

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा.....

बांके है नन्द बाबा और यशुमति,

बांकी घडी जमने है बिहारी,

बांके कन्हैया के बांके है भ्रात,

लड़ाके बड़े हल मूसल धारी,

लड़ाके बड़े हल मूसल धारी,

बांकी मिली दुलहन जगवंदन,

और बांके गोपाल के बांके पुजारी,

भक्तन दर्शन देन के कारण,

झांके झरोखा में बांके बिहारी,

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा,

रसिया की छलिया की,

सजना की सईया की,

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा....

बांकी पागचंद्रिका तापर,

और बांका तुर्रा ररक रहा है,

गरसिरपेच माल और बांकी,

बांके की पटकी चटक अहा है,

बांके की पटकी चटक अहा है,

बांके नैन सेन सर बांके,

बेन बिनोद महा है,

बांके की बांकी झांकी कर,

बाकी रहयो कहा है,

मै तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा,

रसिया की छलिया की,

सजना की सईया की,

मै तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा.......

ये टेड़े सो प्रसन्न, टेडी बातन सो अति प्रसन,

टेड़े टेड़े लक्षण अनेक कान कारे के,

टेड़े टेड़े लक्षण अनेक कान कारे केm

हम सो टेंडाई भूल मत करियो कोई,

हम है उपासी एक टेडी टांग वाले के,

हम है उपासी एक टेडी टांग वाले के,

मै तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा,

रसिया की छलिया की,

सजना की सईया की,

मै तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा.......

टेड़े टिपारे कटारे किरीट की,

मांग की पाग की धारि की जय जय,

कुंडल जाये कपोलन पे,

मुस्कानहु धीर प्रहारी की जय जय,

मुस्कानहु धीर प्रहारी की जय जय,

राजेश्वरी दिन रात रटो,

यही मोहन की बनवारी की जय जय,

प्रेम ते बोलो जी बोलत डोलो,

बोलो श्री बांके बिहारी की जय जय,

बोलो श्री बांके बिहारी की जय जय,

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा,

मै तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा,

मैं तो बांके की बांकी बन गई,

और बांका बन गया मेरा............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।