भोलानाथ अमली जी

लखबीर सिंह लक्खा
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

भोलानाथ अमली जी,

म्हारा शंकर अमली जी,

जटाधारी अमली,

बगिया मे भंगिया बूआय राखुली।

भोलानाथ अमली जी,

म्हारा शंकर अमली जी,

जटाधारी अमली,

सोने के कटोरे में छनाए राखुली।।

काई बोऊ काशीजी में काई जी प्रयाग,

काई बोऊ हर की पैडी काई जी कैलाश,

काशीजी मे केसर बोऊ चंदन प्रयाग,

हर की पैडी बिजया बोऊ धतूरो कैलाश,

भोला नाथ अमली जी.........

काई मांगे नांदियो जी काई जी गणेश,

काई मांगे भोलाशंभू जोगियो रो भेष।

दूर्वा मांगे नांदीयो जी मोदक गणेश,

भंगिया मांगे भोला शम्भू जोगियो रो भेष।

भोला नाथ अमली जी.......

घोटे घोटे नांदियो जी छाणत गणेश,

भर भर प्याला देवे गिरिजा पीवत महेश,

नाचे नाचे नांदियो जी नाचे गणेश,

नाचे म्हारो भोले शम्भू जोगियो रो भेष.....

भोला नाथ अमली जी ..........

आकडा की रोटी पोऊ धतुरे को साग,

विजया की तरकारी छमकू जीमो भोलानाथ,

आगे आगे नांदियो चाले लारे जी गणेश,

बिच पिछाडे मैया चाले जोगियो रो भेष,

भोला नाथ अमली जी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।