हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा

श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – सांवली सूरत पे मोहन

हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा,

मेरे इन होठों पे हैं,

नाम प्रियाकांत प्यारा,

मेरे इन होठों पे हैं.......

बांकी छवि बांकी अदा,

बांकी हंसी बांका चलन,

रूबरू बांका नज़ारा,

मेरे इन होठों पे हैं,

नाम प्रियाकांत प्यारा,

मेरे इन होठों पे हैं...........

एक सूरत आपकी,

और दीवाना सारा जहां,

हाल जो होगा हमारा,

मेरे इन होठों पे हैं,

नाम प्रियकांत प्यारा,

मेरे इन होठों पे हैं.........

मेरी आँखों में कटीली,

अपनी आँखे डालकर,

जो किया तुमने इशारा,

मेरे इन होठों पे हैं,

नाम प्रियकांत प्यारा,

मेरे इन होठों पे हैं.........

हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा,

मेरे इन होठों पे हैं,

नाम प्रियाकांत प्यारा,

मेरे इन होठों पे हैं.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।