करूँणा भरे कृपा भरे मेरे बांके बिहारी सरकार

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

करूणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार.......

जय मंजुल कुंजीन कुंजन की,

रस कुंज विचित्र समाज की जय जय,

यमुना तट बंसीवट की,

गिरिजेश्वर की गिरिराज की जय जय,

ब्रज गोपियन गोप कुमारन की,

विपिणेश्वर के सुख साज़ की जय जय,

ब्रज के सब संतन की,

ब्रज मंडल की ब्रज राज की जय जय,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार.......

रंग प्रेम भरा बरसा करके,

बरसो की वियोग व्यथा हर ले,

मन मेरा मयूर सा नाच उठे,

कुछ भावना भाव नया भरदे,

कुछ भावना भाव नया भरदे,

जलती इस छाती की ज्वाला मिटे,

अपना पद कंज ज़रा धर दे,

हस दे हस दे दृग फेर अगर,

नट नागर नेक कृपा करदे,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार.......

नही चित्र लखा ना चरित्र सुना,

वह सुंदर श्याम को जाने ही क्या,

मन में है बसा मन मोहन जो,

वे ठान किसी पर ठाने ही क्या,

जिस बंदर ने ईमली ही चखी,

वो स्वाद सुधा पहचाने ही क्या,

जिसने हरी प्रेम किया ही नही,

वह प्रेम की आहो को जाने ही क्या,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार,

करूँणा भरे कृपा भरे,

मेरे बांके बिहारी सरकार.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।