तरस रही हैं तेरे दरस को कबसे मेरी नजरिया

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तरस रही है तेरे दरस को,

कबसे मेरी नजरिया माँ,

कबसे मेरी नजरिया,

ओ शेरावाली ओ जोतावाली,

अब तो ले ले खबरिया,

तरस रही हैं तेरे दरस को,

कबसे मेरी नजरिया.........

तेरे दर जो आए सवाली,

भर दी झोली जाए ना खाली,

आओ माँ मेरे सर से उतारो,

आओ माँ मेरे सर से उतारो,

पापों की भारी गठरिया,

तरस रही हैं तेरे दरस को,

कबसे मेरी नजरिया........

तू ही है ज्वाला तू ही है काली,

भक्तो की मैया सदा रखवाली,

दर दर भटके तेरे दरश को,

दर दर भटके तेरे दरश को,

भूली राह डगरिया,

तरस रही हैं तेरे दरस को,

कबसे मेरी नजरिया........

भक्तो जी मंडल तेरा पुजारी,

घर घर में ज्योत जगाए तुम्हारी,

तेरा ही गुणगान करे माँ,

तेरा ही गुणगान करे माँ,

लख्खा हर एक नगरीया,

तरस रही हैं तेरे दरस को,

कबसे मेरी नजरिया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।