मनवा राम सुमिर लै रे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मनवा राम सुमिर लै रे, नहीं तो रोकग जमदानी,

नहीं तो रोकग जमदानी, नहीं तो रोकग जमदानी,

मनवा राम सुमिर लै रे.....

साधु की वाणी सदा सुहानी, ज्यों झिरिया को पाणी रे,

खोजत खोज़त खोज लिया रे, कई हीरा कई कणी,

मनवा राम सुमिर लै रे.....

चुन चुन कंकर महल बनाया, वामे भवर लुभानी रे,

आया ईसरा गया पसारा, झुटी अपनी वाणी,

मनवा राम सुमिर लै रे.....

मेरी मेरी मत कर बंदे, कलु काल का फेरा रे,

तेरे सिर पर काल फिरत है, जैसे सींग मृग को घेरा,

मनवा राम सुमिर लै रे.....

राम नाम का सुमिरन करले, गठरी बांधी तानी रे,

भव सागर से पार उतर जा, नहीं तो जाय नरक की खाणी,

मनवा राम सुमिर लै रे.....

कहे जन सिंगा सुनो भाई साधो, यो पद है निर्वाणी रे,

ये पद की कोई करो खोजना, गुरू बोले अमीरस वाणी,

मनवा राम सुमिर लै रे.....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।