मेरे जीवन की जुड़ गई डोर भोले तेरे चरणों में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे जीवन की जुड़ गई डोर,

ओ भोले तेरे चरणों में.....

तू एक इशारा कर दे,

मैं दौड़ा चला आऊं काशी में,

मैं तो नहाऊ गंगा रोज,

ओ भोले तेरे चरणों में,

मेरे जीवन की जुड़ गई डोर,

ओ भोले तेरे चरणों में.....

तेरी काशी नगरीया प्यारी प्यारी,

मैं वारी तेरी काशी में,

मेरे जीवन की हो जाए भोर,

ओ भोले तेरे चरणों में,

मेरे जीवन की जुड़ गई डोर,

ओ भोले तेरे चरणों में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।