तेरे दर की भीख से है मेरा आज तक गुज़ारा

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर की भीख से है,

मेरा आज तक गुज़ारा,

जीवन का है आधारा,

जीने का है सहारा........

हे करुणा करने वाले,

मेरी लाज रखने वाले,

तेरे ही दर से मिलता,

हर दीन को सहारा,

तेरे दर की भीख से है,

मेरा आज तक गुज़ारा.....

तेरी आस्ता के सदके,

तेरी हर गली पे कुरबां,

तेरा दर है दर हकीक़त,

मेरी जीस्त का सहारा,

तेरे दर की भीख से है,

मेरा आज तक गुज़ारा.....

तेरे प्यार की हदो को,

बस तू ही जानता है,

तुम आ गए वहीँ पे,

मैंने जहाँ पुकारा,

तेरे दर की भीख से है,

मेरा आज तक गुज़ारा.....

क्यों ढूंढते फिरे हम,

तूफानों में सहारा,

तेरे हाथ में ही लहरे,

तेरे हाथ में किनारा,

तेरे दर की भीख से है,

मेरा आज तक गुज़ारा.....

मुझे बेकरार रख कर,

मेरे दिल में बसने वाले,

जो यही है तेरी मर्ज़ी,

तेरा विरह भी है प्यारा,

तेरे दर की भीख से है,

मेरा आज तक गुज़ारा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।