तेरा प्यार पाके हमने

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा प्यार पाके हमने, सब कुछ ही पा लिया है,

तेरे दर पे आके हमने, सर को झुका लिया है,

तेरा प्यार पाके हमने......

आवागमन की गलियां, नाहक बुला रही थी,

जीवन मरण का झूला, हमको झूला रही थी,

अज्ञानता की निंद्रा, हमको सुला रही थी,

नजरे करम हुई है, तेरा असरा लिया है,

तेरा प्यार पाके हमने......

तेरे प्यार वाले बादल, जिस दिन से घिर गए है,

दुर्गुण व्यसन के पर्वत, उस दिन से गिर गए है,

रहमत हुई है तेरी, मेरे दिन ही फिर गए है,

तेरी रोशनी ने सदगुरु, रस्ता दिखा दिया है,

तेरा प्यार पाके हमने......

उपकार के लिए तू अवतार होके आया,

गुरु रूप मे है हमने,भगवान को ही पाया,

नर रूप में नारायण,साकार होके आया,

तेरे शब्द ने ये कैसा जादू जगा दिया है,

तेरा प्यार पाके हमने......

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।