स्वर्ग की सीढियाँ है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

स्वर्ग की सीढियाँ है तेरी सीढियाँ,

सबको मिलती कहाँ माँ तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढियाँ है......

माँ और बेटे में करवाए ये ही मिलन,

बहुत ही मेहरबां है तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढिया है........

रास्ते से कोई भटक पाए नहीं,

भक्तो की निगहबा है तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढिया है......

जो भी चढ़के गया खाली लौटा नहीं,

खुशियों का मुकाम है तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढिया है.......

इक तरफ दर्द है,इक तरफ है दवा,

दोनों के दरमियान है,तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढिया है.....

इनपे रहती है भक्तो के चरणों की धूल,

भाग्यशाली है माँ ये तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढिया है.......

स्वर्ग मैया वही से शुरू होता है,

खत्म होती जहाँ माँ तेरी सीढियाँ,

स्वर्ग की सीढिया है....

स्वर्ग की सीढियाँ है तेरी सीढियाँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।