मेरे अंगने में शिव शंकर जी का वास है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे अंगने में शिव शंकर जी का वास है.......

गौरा जिनकी पत्नी उनका बड़ा नाम है,

डमरू के बजैया शंकर जी उनके पास है,

मेरे अंगने में शिव शंकर जी का वास है.......

लक्ष्मी जिनकी पत्नी उनका भी बड़ा नाम है,

चक्र के चलैया विष्णु जी उनके पास हैं,

मेरे अंगने में शिव शंकर जी का वास है.......

ब्रम्हाणी जिनकी पत्नी उनका भी बड़ा नाम है,

सृष्टि के रचैया ब्रम्हा जी उनके पास हैं,

मेरे अंगने में शिव शंकर जी का वास है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।