कलयुग ऐ कैसी उलटी गंगा भहा रहा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कलयुग ऐ कैसी उलटी गंगा भहा रहा है,

माता पिता को श्रवण ठोकर लगा रहा है,

कलयुग ऐ कैसी उलटी.........

त्रेता में एक ही रावण जिसने चुराई एक सीता,

घर घर में आज रावन सीता चुरा रहा है,

कलयुग ऐ कैसी उलटी ..........

सुनलो मेरी बहनों रहना ज़रा संबल के,

हाथो में पापी राखी बना रहा है,

कलयुग ऐ कैसी उलटी.......

घर में लगा है पर्दा बाज़ार में पर्दा,

ये पतनी कमाने जाए और पति रोटी बना रहा है,

कलयुग ऐ कैसी उलटी .......

बच्चे गरीब के तो रोटी को है तरस ते,

हमारे सेठ जी का कुत्ता बर्फी उड़ा रहा है,

कलयुग ऐ कैसी उलटी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।