सारी उमर गुरु की भक्ति करना है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

फूलो का तारो का सबका कहना है,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना हैं,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना है......

ये ना जाना दुनिया ने,

गुरु भक्ति में है प्यार,

जो भी करता गुरु भक्ति,

वो हो जाता भव से पार,

आ गुरु के पास आ,

कुछ पुण्य कमाना है,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना है...........

भोली भाली समता की,

सूरत जैसा तू,

प्यारी प्यारी जादू की,

मूरत जैसा तू,

हम सभी भक्तो का,

यही तो कहना है,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना है..........

देखो गुरूवर हम सब है,

एक डाली के फूल,

सब कुछ भूल जाना,

हमको ना जाना भूल,

उनके चरणों में जीवन बिताना है,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना है..........

फूलो का तारो का सबका कहना है,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना हैं,

एक हजारो मेंरे गुरुवर है,

सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,

फूलो का तारो का सबका कहना है........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।