केसरिया केसरिया आज हमारो मन

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॥ पावन पाठ ॥

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन केसरिया...

तन केसरिया, मन केसरिया,

पूजा के चावल केसरिया,

भक्ति में हम सब केसरिया,

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन केसरिया...

हम केसरिया, तुम केसरिया,

अष्ट द्रव्य सब हैं केसरिया,

मंदिर की है ध्वजा केसरिया,

भक्ति में हम सब केसरिया.....

इन्द्र केसरिया, इन्द्राणि केसरिया,

सिद्धों की पूजन केसरिया,

पूजा के सब भाव केसरिया,

भक्ति में हम सब केसरिया,

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन केसरिया...

वीर प्रभु की वाणी केसरिया,

अहिंसा परमो धर्म केसरिया,

जीयो जीने दो केसरिया,

भक्ति में हम सब केसरिया,

पीछी केसरिया, कमण्डल केसरिया,

दिगम्बर साधु भी केसरिया

शत शत वंदन है केसरिया,

भक्ति में हम सब केसरिया,

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन केसरिया...

स्वर्णिम रथ देखो केसरिया,

स्वर्ण वरण प्रभुजी केसरिया,

छत्र चंवर ध्वज सब केसरिया,

भक्ति में हम सब केसरिया,

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन

केसरिया, केसरिया,

आज हमारो मन केसरिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।