सब आपकी है माया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आपने तो सब सुख दिए हैं मैया,

ना आपसे कोई गिला है,

दुख जो भी मुझको मिले हैं,

सब कर्मों का मेरे सिला है,

संसार में जो हूँ आया ,

माँ सब आपकी है माया....

मैंने जो कुछ भी है पाया,

सब आपसे ही तो पाया,

मुझ से बेटे पर भी आपने,

मैया सारी खुशियाँ लुटा दी,

बदकिस्मती से जो बदा था,

वो बद की हद मिटा दी,

चुनकर मैया आपने काँटे,

मेरी राह फूलों से भर दी,

मैया लुटा कर आपने ममता,

कृपा राजीव पर कर दी,

आपकी दया से ही तो,

मेरी जीवन अब तक चला है,

दुख जो भी मुझको मिले हैं,

सब कर्मों का मेरे सिला है,

आपने तो सब सुख दिए हैं मैया,

ना आपसे कोई गिला है.....

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।