हरिद्वार में कावड़ लेने मैं भी जाउंगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पिया हरिद्वार में कावड़ लेने मैं भी जाउंगी,

पीछे बरस मैं ना जा पाई, अब के मैं भी जाउंगी,

पिया हरिद्वार में कावड़ लेने.......

पिया करू तेरी सेवा बस डाटों मत ना,

मैं तो जाउंगी पिया जी मन्ने डाटों मत ना,

पिया हरिद्वार में कावड़ लेने मैं भी जाउंगी......

भोले खुशियों से जीवन सबका भरे,

भोले बेड़ा पार है सबका करे,

पिया हरिद्वार में कावड़ लेने मैं भी जाउंगी......

मेरे आस लगी भोले दर्शन की,

पिया कुछ भी ना मांगू, सुनलो मेरे मन की,

पिया हरिद्वार में कावड़ लेने मैं भी जाउंगी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।