तेरे सोणे सोणे दर्शन पावा आनंदपुर रेहन वालया

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे सोणे सोणे दर्शन पावा,

आनंदपुर रेहन वालया,

तेरे दर दा मैं मंगता कहावा,

आनंदपुर रेहन वालया.......

चरना दी धूल मथे नाल लावा मैं,

लख लख वारी तेरा शुकर मनावा मैं,

हर साह नाल गुण तेरे गावा,

आनंदपुर रेहन वालया,

तेरे सोणे सोणे दर्शन पावा......

तेरे दर दी करा मैं सेवा,

भूल के जग सारा जपा नाम तेरा,

एह तन मन लेखे तेरे लावा,

आनंदपुर रेहन वालया,

तेरे सोणे सोणे दर्शन पावा......

नैना नू प्यास दाता तेरे ही दीदार दी,

मैनु बस लोड़ दाता तेरे ही प्यार दी,

तेरा रज रज दर्शन पावा,

आनंदपुर रेहन वालया,

तेरे सोणे सोणे दर्शन पावा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।