जो खाली झोली लै आवे ओहदी भरपूर करदा है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जो खाली झोली लै आवे ओदी भरपूर करदा है....

जिनां सतगुरु मनाया है, ओहदा रब रूस नहीं सकदा,

जो है मंजूर सतगुरु नूँ, ओ रब मंजूर करदा है,

जो खाली झोली लै आवे......

सिधक वालों जरुरी नहीं कि हर एक मांग होवे पूरी,

जो है सुखदायी गुरुमुख लई ओं पूरी जरुर करदा है,

जो खाली झोली लै आवे......

खोटे सिक्के वी चल जाँदे तेरे दरबार ते आकें,

नजर मेहरां दी जद पावे ओ नूरों नूर करदा है,

जो खाली झोली लै आवे......

दुखां नूँ आन नहीं देंदा सुखां नूँ जान नहीं देंदा,

मगर सेवक दे हर कारज ऐ पूरे जरूर करदा है,

जो खाली झोली लै आवे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।