मैनू इतना प्यारा गुरु मिला

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॥ पावन पाठ ॥

( मैनू सतगुरु जी दा प्यार मिला,

सतगुरु दा दरबार मिला,

जिन्हां दे चरणां च दुनिया झुक्दी,

मैनू अनमोल वो मोती मिला॥ )

अम्बर दूंढ़ा सागर दूंढ़ा, गुरु तो कोई अनमोल नही,

गुरु तो वध के इस दुनिया विच दुजी कोई सौगात नही,

मैनू इतना प्यारा गुरु मिला.....

अपने रंग विच रंग डालो, किसी होर रंग दी लोड़ नही,

गुरु दा प्यार पा के प्यारे, दुनिया दी मैनु परवाह नही,

बड़ भागी मै गुरु नू पाया, रब्ब नू भी है पा लेया,

मैनू इतना प्यारा गुरु मिला.....

तेरे दर्शन दे नैना बावरे आके दर्शन दिया करो,

नैना दी ए खिड़की खोल के हर पल मैनू मिला करो,

हर इक सांस में हो तेरा सिमरन, बीत जाये जीवन मेरा,

मैनू इतना प्यारा गुरु मिला, गुरु दा सोहणा दरबार मिला.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।