पुंगल रा पड़िहारा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

पुंगल रा पड़िहारा बीरा, पुंगल रा पड़िहारा रे,

महान भोत घणों दुख देवे बीरा पुंगल रा पड़िहारा रे.....

जीवड़ो उमीजे बीरा महारो धोरा मैं रै,

जीवड़ो उमीजे बीरा महारो धोरा मैं रै,

महान भोत घणों......

राखडली पूनम न बीरा याद थारी आव रे,

राखडली पूनम न बीरा याद थारी आव रे,

महान भोत घणों......

सासू जी लड़ है बीरा ननंदल ताना मार र

सासू जी लड़ है बीरा ननंदल ताना मार र

महान भोत घणों......

सुनता पुकार आव धजाबंद श्री र

सुनता पुकार आव धजाबंद श्री र

महान भोत घणों......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।