रामदेव ने कहिजे लवण बेगो आइजे

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

उड़ता कागलिया संदेशो महारो देइजे,

राम देव न कहीजे लेवण बैगो आईजे।।

ऊबी झरोका बीरा कागलियां उड़ाऊ,

ऊबी झरोका बीरा कागलियां उड़ाऊ,

आधी आधी राता माही आसुडा ढलकाऊ,

आधी आधी राता माही आसुडा ढलकाऊ,

उड़ता कागलिया........

छोटी सी उमर बीरा महान परनाई,

छोटी सी उमर बीरा महान परनाई,

जीवडो उमिजे बीरा महारो धोरा माई,

जीवडो उमिजे बीरा महारो धोरा माई,

उड़ता कागलिया........

आव ओलूडी बीरा याद थारी आव,

आव ओलूडी बीरा याद थारी आव,

थारी यादा में बीरा धान नही भाव,

थारी यादा में बीरा धान नही भाव,

उड़ता कागलिया........

पिछम धारा रा पीरा लीले री सवारी,

पिछम धारा रा पीरा लीले री सवारी,

धर्मपाल गावे सुणज्यो अर्ज हमारी,

धर्मपाल गावे सुणज्यो अर्ज हमारी,

उड़ता कागलिया........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।