भोले बाबा तेरा मुस्कुराना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा तेरा मुस्कुराना,

भूल जाने के काबिल नहीं है,

रूप तेरा है ऐसा सलोना,

जो बताने के काबिल नहीं है......

माथे ते चंद्रमा जगमगाता,

सत्य का पथ जगत को दिखाता,

गंग की थार बहती जटा से,

जो बताने के काबिल नहीं है,

भोले बाबा तेरा मुस्कुराना..........

माथे पर तूने तिरपुण्ड धारा,

रूप तेरा लगे प्यारा प्यारा,

नाग सोहै गले में तुम्हारे,

जो बताने के काबिल नहीं है,

भोले बाबा तेरा मुस्कुराना..........

भस्म तन पे तुम्हारे लगी है,

सामने धूनी जग मग जगी है,

राजेंद्र मृगछाला तन पर लपेटे,

जो बताने के काबिल नहीं है,

भोले बाबा तेरा मुस्कुराना..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।