मेरा घर इक कुटिया गरीब की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा घर एक कुटिया गरीब की,

मेरी कुटिया छोड़ के मत जइयो,

मेरे दिल मे बना तेरा मन्दिर माँ,

मेरे दिल को तोड़ के मत जइयो,

मेरा घर इक.........

ना जइयो ना जइयो माँ ना जइयो ना जइयो

कुछ और न चाहे हो दाती,उस घर में सदा तेरा वास रहे,

पापो के अंधेरे दूर हटे,तेरी ज्योति का प्रकाश रहे,

हम भटके अगर तो भी हमसे,अपना मुंह मोड़ के मत जइयो,

मेरा घर इक....

हे जगदम्बे तेरी राहों में,हम पलके बिछाये बैठे है,

किस पल आओगी ये तो कहो,हम आस लगाये बैठे हैं,

है सबको भरोसा आएगी माँ,विश्वास ये तोड़ के मत जइयो,

मेरा घर इक....

इस घर मे बसा हर इक प्राणी,तेरी भगति में मग्न है माँ,

आँखों मे बसी सूरत तेरी,और ह्रदय में तेरी लग्न है माँ,

अनमोल ह्रदय का आंसुओं के,संग नाता जोड़ के मत जइयो,

मेरा घर इक....

गायक एवम लेखक

राज अनमोल..9811470570

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।