झूला झूले हो गजानंद झुलना

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

झूला झूले हो गजानंद झुलना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना.....

काहे की डाली पे झूला बंधाये,

झूला बंधाये, झूला बंधाये,

काहे के लागे पालना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना......

पीपल की डाली पे झूला बंधाये,

झूला बंधाये, झूला बंधाये,

चंदन के लागे हो पालना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना......

काहे की पलने में डोर लगाए,

डोर लगाए तुमने, डोर लगाए,

काहे के लगाए फुँदना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना......

पलने में रेशम की डोर लगाए,

डोर लगाए तुमने, डोर लगाए,

किसम किसम के फुँदना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना.....

कौन गजानन्द को लोरी सुनाये,

लोरी सुनाये, लोरी सुनाये,

कौन सुलाए पालना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना.....

गोरा गजानन्द को लोरी सुनाये,

लोरी सुनाये तुमको, लोरी सुनाये,

शिवजी झुलाये पालना,

झूले झूले हो गजानंद झुलना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।