नित नेम से जो भी उठकर वाल्मीकि जी को ध्याता है

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नित नेम से जो भी उठकर वाल्मीकि जी को ध्याता है,

हर संकट मिट जाये उसका सुखी जीवन हो जाता है,

कर देते माला माल जगत गुरु वाल्मीकि,

आये दुनिया में अवतार जगत गुरु वाल्मीकि,

करने दुनिया का उद्धर जगत गुरु वाल्मीकि.....

आदि कवि प्रभु वाल्मीकि जी रामायण के रचयिता है,

चारो युगो के है अवतार हर युग में तुम्हें देखा है,

सुन दुखियो की ये पुकार जगत गुरु वाल्मीकि,

आये दुनिया में अवतार जगत गुरु वाल्मीकि,

करने दुनिया का उद्धर जगत गुरु वाल्मीकि.....

मां सीता को दुख ने घेरा सुख का आशियाना दीया प्रभु,

लव और कुश को देके भेजो बन गए थे उनके गुरु,

पासी केसरी का करदो उद्धार जगत गुरु वाल्मीकि,

आये दुनिया में अवतार जगत गुरु वाल्मीकि,

करने दुनिया का उद्धर जगत गुरु वाल्मीकि.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।