वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे

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॥ पावन पाठ ॥

काम का नाम यूँही ऊँचा करेंगे,

काम का नाम यूँही ऊँचा करेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

रुकेंगे नहीं हम आगे बढ़ेंगे रुकेंगे नहीं हम आगे बढ़ेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे.......

कृपा है दाता की वाल्मीकि घर में जन्म है पाया,

प्रभु वाल्मीकि छोड़ ये दामन कही नहीं फैलाया,

कृपा है दाता की वाल्मीकि घर में जन्म है पाया,

प्रभु वाल्मीकि छोड़ ये दामन कही नहीं फैलाया,

दिल में ना कोई भरम रखेंगे दिल में ना कोई भरम रखेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे.......

ना कोई लालच ना कोई डर ही हमको डराए,

भरी सभा में लाल वाल्मीकि कहते ना शर्माए,

ना कोई लालच ना कोई डर ही हमको डराए,

भरी सभा में लाल वाल्मीकि कहते ना शर्माए,

मान सम्मान यु ही क़याम रखेंगे मान सम्मान यु ही क़याम रखेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे.......

कृपा है दाता की वाल्मीकि घर में जन्म है पाया,

प्रभु वाल्मीकि छोड़ ये दामन कही नहीं फैलाया,

कृपा है दाता की वाल्मीकि घर में जन्म है पाया,

प्रभु वाल्मीकि छोड़ ये दामन कही नहीं फैलाया,

दिल में ना कोई भरम रखेंगे दिल में ना कोई भरम रखेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे.......

ना कोई लालच ना कोई डर ही हमको डराए,

भरी सभा में लाल वाल्मीकि कहते ना शर्माए,

ना कोई लालच ना कोई डर ही हमको डराए,

भरी सभा में लाल वाल्मीकि कहते ना शर्माए,

मान सम्मान यु ही क़याम रखेंगे मान सम्मान यु ही क़याम रखेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे,

वाल्मीकि में ही जिए हम वाल्मीकि में ही मरेंगे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।