सब दी आस पुजाई वे साईं

पारंपरिक
अन्य गुरु वाणी साईं भजन guru-vani
॥ पावन पाठ ॥

सब दी आस पुजाई वे साईं,

मेहर दा मीह वरसी वे साईं मेहर दा मीह वरसी,

कोई ना होवे दुखीअरा,

खुश होवे संसार सारा,

सबदे कम बनाई वे साईं सबदे कम बनाई,

सब दी आस पुजाई वे साईं.......

सबदिया आसा पुरिया करदे,

दूर सबे मजबूरियां करदे,

अपने वचन निभाई साईं,

सब दी आस पुजाई वे साईं.......

कोई भी मोहताज ना होवे,

रोग कोई लाही लाज ना होवे,

सबदे कष्ट मिटाई साईं,

सब दी आस पुजाई वे साईं...

घर घर खुशाली होवे,

गोद न कोई खाली होवे,

घर घर बाल खिलाई,

सब दी आस पुजाई वे साईं...

निर्मल नु बलवान बना दे,

निर्धन नु धनवान बनादे,

हर भूल चुक बक्शाई,

सब दी आस पुजाई वे साईं....

शरणा घट बन जो वी आवे,

मन वंचित सुख तेतो पावे,

मुकी दी गल मुकाई,

सब दी आस पुजाई वे साईं....

सब ली खुशिया दे पल मांगिये,

साहिल सब दा मंगल मानिये,

एहो मंग मंगवाई साईं एहो मंग मंगवाई,

सब दी आस पुजाई वे साईं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।