दादी उपकार ये तेरा है

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – दुनिया में देव हजारों है

इस जग में नाम जो मेरा है,

दादी उपकार ये तेरा है,

दादी उपकार ये तेरा है,

दादी उपकार ये तेरा है,

इस जग में नाम जो मेरा हैं,

दादी उपकार ये तेरा है......

किरपा से तेरी दादी जी,

इन होंठों को मुस्कान मिली,

अब घर में मेरे खुशियों का,

दादी दिन रेन बसेरा है,

इस जग में नाम जो मेरा हैं,

दादी उपकार ये तेरा है.....

जबसे तेरा गुणगान किया,

जग वालों ने सम्मान दिया,

ये सारी दुनिया जान गई,

जो नाता तेरा मेरा है,

इस जग में नाम जो मेरा हैं,

दादी उपकार ये तेरा है......

अपनी किस्मत है बहुत बड़ी,

हमको तेरा दरबार मिला,

तेरा मेरा माँ और बेटी का,

रिश्ता ये सबसे गहरा है,

इस जग में नाम जो मेरा हैं,

दादी उपकार ये तेरा है.....

कहता ये शिवम हर जन्म में माँ,

मेरे सर पे तेरा हाथ रहे,

तेरे चरणों की सेवा से ही,

जीवन में सांझ सवेरा है,

इस जग में नाम जो मेरा हैं,

दादी उपकार ये तेरा है.....

इस जग में नाम जो मेरा है,

दादी उपकार ये तेरा है,

दादी उपकार ये तेरा है,

दादी उपकार ये तेरा है,

इस जग में नाम जो मेरा हैं,

दादी उपकार ये तेरा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।