ऊचे परबतां ते सोहना तेरा मंदिर माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ऊंचे परबतां ते सोहना तेरा मंदिर माँ,

जिथे जगदिया ज्योता अंदर माँ.....

ऊंचे परबतां ते गुफा निराली ए,

इस गुफा च शेरावाली ए.....

ऊंचे परबतां ते शेर तेरा गजदा माँ,

दूरो वेखा भवन तेरा सजदा माँ.....

तेरे मंदिरा च वजदिया टल्लियाँ माँ,

भगता ने देहलीज़ा मल्लियां माँ.....

ਉੱਚੇ, ਪਰਬਤਾਂ ਤੇ, ਸੋਹਣਾ ਤੇਰਾ, ਮੰਦਿਰ ਮਾਂ ll,

ਜਿੱਥੇ, ਜੱਗਦੀਆਂ ਜੋਤਾਂ, ਅੰਦਰ ਮਾਂ xll

ਉੱਚੇ, ਪਰਬਤਾਂ ਤੇ, ਗੁਫ਼ਾ, ਨਿਰਾਲੀ ਏ ll,

ਇਸ, "ਗੁਫ਼ਾ 'ਚ, ਸ਼ੇਰਾਂ ਵਾਲੀ ਏ" xll

ਉੱਚੇ, ਪਰਬਤਾਂ ਤੇ, ਸ਼ੇਰ ਤੇਰਾ, ਗੱਜਦਾ ਮਾਂ ll,

ਦੂਰੋਂ "ਵੇਖਾਂ, ਭਵਨ ਤੇਰਾ, ਸੱਜਦਾ ਮਾਂ" xll

ਤੇਰੇ, ਮੰਦਿਰਾਂ 'ਚ, ਵੱਜਦੀਆਂ ਟੱਲੀਆਂ ਮਾਂ* ll,

ਭਗਤਾਂ ਨੇ, ਦਹਿਲੀਜ਼ਾਂ, ਮੱਲ੍ਹੀਆਂ ਮਾਂ xll

ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।