रूस ना जावी सतगुरु मेरे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

रूस ना जावी सतगुरु मेरे,

जीवन मेरा सहारे तेरे,

अपने पराये ताने मारदे,

वास्ते तेनु मेरे प्यार दे,

अपना बना ले प्रीतम मेरे,

जीवन मेरा सहारे तेरे,

तू रुस्या ते किस दर जावा,

हाल दिला दे किसनु सुनवा,

कौन सुनेगा दुकडे मेरे,

मेरा जीवन सहारे तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।