मनुष जनम अनमोल रे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मनुष जनम अनमोल रे,

मिट्टी मे ना रोल रे,

अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,

कभी नही कभी नही रे,

ॐ साई नमो नमः,

श्री साई नमो नमः......

तु सत्संग मे आया कर,

गीत प्रभु के गाया कर,

साँझ सवेरे बेठ के बन्दे,

गीत प्रभु के गाया कर,

नही लगता कुछ मोल रे,

मिट्टी मे ना रोल रे,

अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,

कभी नही कभी नही रे........

तु है बूद बूद पानी का,

मत कर जोर जवानी का,

समझ समझ के क़दम रखो,

पता नही ज़िन्दगानी का,

सबसे मीठा बोल रे,

मिट्टी मे ना रोल रे,

अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,

कभी नही कभी नही रे......

मतलब का संसार है,

इसका क्या ऐतबार है,

सम्भल सम्भल के क़दम रखो,

फूल नही अंगार है,

मन की आँखे खोल रे,

मिट्टी मे ना रोल रे,

अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,

कभी नही कभी नही रे......

मनुष जनम अनमोल रे,

मिट्टी मे ना रोल रे,

अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,

कभी नही कभी नही रे,,

ॐ साई नमो नमः,

श्री साई नमो नमः......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।