एक डाल दो पंछी रे बैठा

संत कबीर
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एक डाल दो पंछी बैठा,

कौन गुरु कौन चेला |

गुरु की करनी गुरु भरेगा,

गुरु की करनी गुरु भरेगा |

चेला की करनी चेला रे साधु भाई,

उड़ जा हंस अकेला ||

माटी चुन चुन महल बनाया,

लोग कहे घर मेरा |

ना घर तेरा ना घर मेरा,

ना घर तेरा ना घर मेरा |

चिड़िया रैन बसेरा रे साधु भाई,

उड़ जा हंस अकेला ||

माता कहे ये पुत्र हमारा,

बहन कहे ये वीरा |

भाई कहे ये भुजा हमारी,

भाई कहे ये भुजा हमारी |

नारी कहे नर मेरा रे साधु भाई,

उड़ जा हंस अकेला ||

पेट पकड़ के माता रोई,

बांह पकड़ के भाई |

लपट झपट के तिरिया रोये,

लपट झपट के तिरिया रोये |

हंस अकेला जाई रे साधु भाई,

उड़ जा हंस अकेला ||

कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी,

जोड़ भरेला थैला |

कहत कबीर सुनो भाई साधो,

कहत कबीर सुनो भाई साधो |

संग चले ना ढेला रे साधुभाई,

उड़ जा हंस अकेला ||

एक डाल दो पंछी बैठा,

कौन गुरु कौन चेला |

गुरु की करनी गुरु भरेगा,

गुरु की करनी गुरु भरेगा |

चेला की करनी चेला रे साधु भाई,

उड़ जा हंस अकेला ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।