कान्हा बरसाने में आय जइयो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा बरसाने में आय जइयो बुलाई गई राधा प्यारी,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने में आय जइयो बुलाई गई राधा प्यारी,

बुलाई गई राधा प्यारी,

बुलाई गई राधा प्यारी,

बुलाई गई राधा प्यारी,

ओ कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी.......

जब कान्हा रे तोहे भूख लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे भूख लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे भूख लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे भूख लगेगी,

आहा माखन मिशरी खाए जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी......

जब कान्हा रे तोहे प्यास लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे प्यास लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे प्यास लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे प्यास लगेगी,

आहा ठंडा पानी पी जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी......

जब कान्हा रे तोहे ठंड लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे ठंड लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे ठंड लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे ठंड लगेगी,

आहा काली कंबलिया ले जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी......

जब कान्हा रे तोहे गर्मी लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे गर्मी लगेगी

जब कान्हा रे तोहे गर्मी लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे गर्मी लगेगी

आहा मोर का पंखा ले जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी......

जब कान्हा रे तोहे नींद लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे नींद लगेगी

जब कान्हा रे तोहे नींद लगेगी,

जब कान्हा रे तोहे नींद लगेगी

आहा मखमली गद्दे पे सो जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी,

कान्हा बरसाने मे आय जइयो,

बुलाई गई राधा प्यारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।