डमरू वाले भोले भाले मेने दामन पसारा है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – एक प्यार का नगमा है

संकट का नजारा है,

अब तू ही सहारा है,

डमरू वाले भोले भाले,

मैंने दामन पसारा है......

त्रिभुवन में बड़ा सबसे,

महादेव कहाता है,

भव डूबती नैया को,

तू ही पार लगाता है,

मालिक है ज़माने का,

किश्ती का किनारा है,

डमरू वाले भोले भाले,

मैंने दामन पसारा है......

चौखट से तेरी कोई,

खाली नही जाता है,

भरता है सदा झोली,

दाताओ का दाता है,

औरो के लिए अम्रत,

खुद जहर पचाया है,

डमरू वाले भोले भाले,

मैंने दामन पसारा है......

कलि काल में मुश्किल है,

तेरा ध्यान धरु कैसे,

दुश्वार हुआ जीना,

व्रत नेम करू कैसे,

भक्ति ना कोई तप है,

एक नाम तुम्हारा है,

डमरू वाले भोले भाले,

मैंने दामन पसारा है......

तेरे दर का भिखारी हु,

तेरे द्वार पे आया हु,

झोली को मेरी भर दो,

अरमान ये लाया हु,

चेतन हो तुम्ही जग में,

जग तुमसे ही सारा है,

डमरू वाले भोले भाले,

मैंने दामन पसारा है......

संकट का नजारा है,

अब तू ही सहारा है,

डमरू वाले भोले भाले,

मैंने दामन पसारा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।