कर ना सके जो कोई भी करके दिखा दिया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

कर ना सके जो कोई भी,

करके दिखा दिया,

सेवक ने अपने स्वामी पे,

नौकर ने अपने मालिक पे,

कर्जा चढ़ा दिया......

सीता से राम बिछड़े है,

रोए बिलख बिलख कर,

मिल ना सके जो जीवन भर,

मिल ना सके जो जीवन भर,

पल में मिला दिया,

कर ना सकें जो कोई भी,

करके दिखा दिया,

सेवक ने अपने मालिक पे,

कर्जा चढ़ा दिया......

लक्ष्मण का हाल देखिये,

दुनिया से जा रहे है,

दीपक जो बुझने जा रहा,

दीपक जो बुझने जा रहा,

फिर से जला दिया,

कर ना सकें जो कोई भी,

करके दिखा दिया,

सेवक ने अपने मालिक पे,

कर्जा चढ़ा दिया......

रहते थे राम महलों में,

वनवासी हो गए थे,

बनवारी फिर अयोध्या का,

बनवारी फिर अयोध्या का,

राजा बना दिया,

कर ना सकें जो कोई भी,

करके दिखा दिया,

सेवक ने अपने मालिक पे,

कर्जा चढ़ा दिया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।