राम राम रटु राम राम जपु जीहा

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम राम रटु, राम राम रटु, राम राम जपु जीहा।

राम-नाम-नवनेह-मेहको, मन! हठि होहि पपीहा॥१॥

सब साधन-फल कूप सरित सर, सागर-सलिल निरासा।

राम-नाम-रति-स्वाति सुधा सुभ-सीकर प्रेम-पियासा॥२॥

गरजि तरजि पाषान बरषि, पबि प्रीति परखि जिय जानै।

अधिक-अधिक अनुराग उमँग उर, पर परमिति पहिचानै॥३॥

रामनाम-गत, रामनाम-मति, रामनाम अनुरागी।

ह्वै गये हैं जे होहिगे, त्रिभुवन, तेइ गनियत बड़भागी॥४॥

एक अंग मम अगम गवन कर, बिलमु न छिन-छिन छाहै।

तुलसी हित अपनो अपनी द्सि निरुपधि, नेम निबाहैं॥५॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।