गजानंद नाव मेरी पड़ी मजधार है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गजानंद नाव मेरी पड़ी मजधार है,

तू ही खिवैया जग का तू ही पतवार है,

गजानन्द नाव मेरी पड़ी मजधार है......

तुम ही रिद्धि सिद्धि के दाता,

गजानंद पार करना,

नाव है बिच भंवर में,

मेरा उद्धार करना,

अब तो तेरे भरोसे हो, मेरा परिवार है,

गजानन्द नाव मेरी पड़ी मजधार है......

मेरे ओ गणपति देवा,

करूँ अब तेरी सेवा,

भोग लड्डुअन का लगाऊं,

दूर करो कष्ट देवा,

तुझको पहले मनाता हो, सारा संसार है,

गजानन्द नाव मेरी पड़ी मजधार है......

मेरे परिवार को देवा,

सदा खुशहाल रखना,

दया की दृष्टि रखना,

तू मालामाल करना,

तेरा ही ध्यान लगता हो, सेवक हर बार है,

गजानन्द नाव मेरी पड़ी मजधार है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।