मेरे दिन बंधू भगवान रे गरुड़ पर चढ़कर आ जाना

पारंपरिक
महादेव भजन विष्णु भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिन बंधू भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना,

मेरे दिन बंधू भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना.......

मेरी साँस चले ना पावा,

ना जीभा चले ना गाना,

मेरा जिव चले भगवान तो तुम,

शिव जी बनकर आ जाना,

मेरे दिन बंधु भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना......

गुजरू जब में गुलजारी,

ये दुनिया रहे ना सारी,

गुजरू जब में गुरुदेव तो तुम,

सतगुरु बनकर आ जाना,

मेरे दिन बंधु भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना......

चलने की हो तैयारी,

तब घोड़ा मिले ना गाड़ी,

मेरी शैया छूटे घनश्याम तो तुम,

नैया लेकर आ जाना,

मेरे दिन बंधू भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना......

यमदूत बनाये बंदी,

और काया होगी गन्दी,

जब जाऊँ में शमशाम तो तुम,

नंदी लेकर आ जाना,

मेरे दिन बंधु भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना.......

जब आये मरण का मौका,

कही हो ना जाये धोका,

मेरे ज्ञान के दाता गुरुदेव रे तुम,

कोई नौका लेकर आ जाना,

मेरे दिन बंधु भगवान रे,

गरुड़ पर चढ़कर आ जाना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।