ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – चार दिनों का प्यार ओ रब्बा (लम्बी जुदाई)

( बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों,

जिऊंगी मैं कैसे इस हाल में बरसों,

राधा पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,

आजा देर लगाए॥ )

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,

देर लगाए,

भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,

आजा देर लगाए,

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए......

एक तो श्याम मेरे पास नहीं रे,

दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,

दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,

उसपे ये सावन आया, हाय

उसपे ये सावन आया,

आग लगायी,

आजा देर लगाए,

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,

देर लगाए,

भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,

आजा देर लगाए,

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए......

चिठ्ठीये नी दर्द फ़िराक़ वालिये,

ले जा ले जा संदेशा सोहणे यार दा

तेनु वासता दिल दी पुकार दा

ले जा ले जा संदेशा सोहणे यार दा....

बाग उजड़ गए खिलने से पहले,

श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले,

कोयल की कुक ने हुक लगाई,

आजा देर लगाए,

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,

देर लगाए,

भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,

आजा देर लगाए,

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए.....

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,

देर लगाए,

भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,

आजा देर लगाए,

ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।