मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा

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॥ पावन पाठ ॥

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा.....

अरमानो के दिप जले है,

हमको सच्चे भक्त मिले है,

फिर कब मिलेगा ऐसा नजारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा......

सब भक्तो से मेरा कहना,

भूल चूक की माफ़ी देना,

तुमसे बिछुड़ना ना हमको गवारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा......

कथा श्रवण को भूल ना जाना,

प्रभु चरणों में ध्यान लगाना,

इसी से बनेगा मुकद्दर तुम्हारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा.....

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

रही ज़िन्दगी तो मिलेंगे दोबारा,

मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।