ग्यारस की रात फिर आयी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – कैसी मुरलिया बजाई रे

ग्यारस की रात फिर आयी रे,

कीर्तन की रात फिर आई रे,

श्याम मिलन हो रहा,

ग्यारस की रात फिर आई रे,

श्याम मिलन हो रहा है......

मिलती नजर तो दिल है उछलता,

झुकती ना पलके मनवा ना भरता,

बाबा की जयकार गूंजे गगन में,

दर्शन तेरा सारे दुखड़े है हरता,

श्याम मिलन हो रहा है,

ग्यारस की रात फिर आई रे......

जाने क्या जादू करता सांवरिया,

देखन वाला होता बावरिया,

जी करता है वापस ना जाए,

जाए तो बाबा को ले आए,

श्याम मिलन हो रहा है,

ग्यारस की रात फिर आई रे......

आते जो खाटू में प्रेमी दीवाने,

ले जाते वो मनचाहे खजाने,

बाबा भी भक्तों का आशिक पुराना,

चौखानी आया है इनको रिझाने,

श्याम मिलन हो रहा है,

ग्यारस की रात फिर आई रे.......

ग्यारस की रात फिर आयी रे,

कीर्तन की रात फिर आई रे,

श्याम मिलन हो रहा,

ग्यारस की रात फिर आई रे,

श्याम मिलन हो रहा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।