जयति जयति जय काशी वाले

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काशीवाले देवघर वाले भोले डमरू धारी

काशीवाले देवघर वाले भोले डमरू धारी,

खेल तेरे है नाथ निराले शिवशंकर त्रिपुरारी......

जयति जयति जय काशी वाले,

काशीवाले देवघर वाले,

खेल है तेरे नाथ निराले,

जय शंभू जय जय शंभू,

भोले जय शंभू जय जय शंभू......

जो भी तेरा ध्यान धरे,

उसका सुर नर मान करे,

जनम मरन से वो उभरे,

भोले चरण तुम्हारे जो धरले,

दया करो विष पीने वाले,

भक्तो जनो के तुम रखवाले,

तुम बिन नैय्या कौन संभाले,

जय शंभू जय जय शंभू,

भोले जय शंभू जय जय शंभू......

ऐसे हो औघड़ दानी,

देते हो वर मनमानी,

भसमा सुर था अभिमानी,

भसमा करने की शैतानी,

तो पार्वती बन विष्णु आए,

दगाबाज को मजा चखाए,

भाग धतूरा फिर आप खाए,

जय शंभू जय जय शंभू,

भोले जय शंभू जय जय शंभू......

अपनी विपदा किसे सुनाए,

मन में इक आशा है लाए,

श्री चरणों की धूल मिले जो,

नैन हमारे दर्शन पाए,

आस हमारी पूरी करदो,

मेरी खाली झोली भरदो,

एक नज़र मुझपे भी करदो,

जय शंभू जय जय शंभू

भोले जय शंभू जय जय शंभू.......

जो भी आया तेरे द्वारे,

जागे उसके भाग सितारे,

मैं शरणागत शरण तिहारे,

भोले शरण तिहारे शरण तिहारे,

तरु नही कोई लाखो तारे,

शर्मा को मत भूलो स्वामी,

हे कैलाशी अंतर्यामी,

ओम नमः शिव नमो नामामी,

जय शंभू जय जय शंभू

भोले जय शंभू जय जय शंभू......

जयति जयति जय काशी वाले,

काशीवाले देवघर वाले,

खेल है तेरे नाथ निराले,

जय शंभू जय जय शंभू,

भोले जय शंभू जय जय शंभू......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।