जय दुर्गे दुर्गा भवानी अष्ट भुजा वाली माता

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय दुर्गे दुर्गा भवानी,

अष्ट भुजा वाली माता,

अष्ट भुजा वाली माँ,

शक्ति स्वरूपिणी,

भक्तो की रखवाली माता,

जय दुर्गे दुर्गां भवानी,

अष्ट भुजा वाली माता......

एक भुजा शंख माता,

दूजा कमल फूल,

तीजा हस्त चक्र माता,

चौथा माँ त्रिशूल,

जय अम्बे अम्बिका भवानी,

कष्ट हरण वाली माता,

कष्ट हरण वाली माँ,

उद्धारिणी तारिणी,

भक्तो की रखवाली माता,

जय दुर्गे दुर्गां भवानी,

अष्ट भुजा वाली माता......

पंचम भुजा धनुष बाण,

षष्ट गदाधारी,

सप्तम भुजा फरसा माता,

अष्टम कटारी,

जय चंडी रणचण्डिका भवानी,

दुष्ट दलन वाली माता,

दुष्ट दलन वाली माँ,

त्रिनेत्र त्रिगुणमयी,

भक्तो की रखवाली माता,

जय दुर्गे दुर्गां भवानी,

अष्ट भुजा वाली माता......

जय दुर्गे दुर्गा भवानी,

अष्ट भुजा वाली माता,

अष्ट भुजा वाली माँ,

शक्ति स्वरूपिणी,

भक्तो की रखवाली माता,

जय दुर्गे दुर्गां भवानी,

अष्ट भुजा वाली माता......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।