तुमको आना पड़ेगा हरि

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – जिंदगी की ना टूटे लड़ी

मेरी नैया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि,

आज विपदा क्यों आन पड़ी,

आज विपदा क्यों आन पड़ी,

मुझे आके सम्भालो हरि,

मेरी नईया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि.....

तेरे होते ये क्या हो रहा,

नैया डूबेगी अब लग रहा,

मुझको ऐसा क्यों लगता है श्याम,

मेरी अर्जी ना तू सुन रहा,

अब जरुरत है आन पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि,

मेरी नईया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि......

मैंने तुझको था साथी चुना,

अब ढूँढू मैं किसको बता,

तूने हरपल सहारा दिया,

क्या गलती मेरी तू बता,

मेरी पकड़ो कलाई अभी,

तुमको आना पड़ेगा हरि,

मेरी नईया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि.....

तेरे होते ना चिंता मुझे,

सोच के था मैं आगे बढ़ा,

गर डूबा भवर में प्रभु,

पंकज पूछेगा तुमसे सदा,

लाज जाएगी तेरी हरि,

तुमको आना पड़ेगा हरि,

मेरी नईया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि.....

मेरी नैया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि,

आज विपदा क्यों आन पड़ी,

आज विपदा क्यों आन पड़ी,

मुझे आके सम्भालो हरि,

मेरी नईया भंवर में पड़ी,

तुमको आना पड़ेगा हरि......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।