हे अष्ठ भवानी माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे अष्ठ भवानी माता तेरे द्वार पे जो भी आता,

हे वैष्णव रानी माता तेरे द्वार पे जो भी आता,

सोई तकदीर उसकी जगी रे,

मेरी दाती तेरी बाती मैं जलाऊं दिन राती,

मेरी माता तू आजा,

हे अष्ठ भवानी माता.....

छुटे ना दर कभी मां छुटे ना दर, मेरे जीवन की आस यही है,

निस दिन तेरे दर्शन पाऊं नयनों की प्यास यही है,

मेरी दाती तेरी बाती मैं जलाऊं दिन राति,

मेरी माता तू आजा,

हे अष्ठ भवानी माता.....

जब से तेरा मां तेरा द्वार मिला है, मैं गया भूल दर दर भटकना,

तेरे ही द्वार पे सब कुछ मिला है, फिर क्यों दर दर भटकना,

मेरी दाती तेरी बाती मैं जलाऊं दिन राती,

मेरी माता तू आजा,

हे अष्ठ भवानी माता.....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।